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Pooja's We Do ! We perform all kind of spritual work for you & for your family at very affordable rates

गंगा पूजा / त्रिवेणी पूजा

गंगा पूजा श्री प्रयाग मे आनेवाले प्रतेक व्यक्ति को त्रिवेणी (गंगा / यमुना / सरस्वती) की भेट किया जाना आवस्यक है क्योकि इसमे हम अपने बाल-गोपाल( पुत्र-पुत्रियों), परिवार के सादस्यो की रक्षा की प्राथना करते है तथा मृतिक प्राणी के नाम या किसी भी प्राणी के नाम से गंगा जी की आरती श्रींगार, भंडारा मे दान देते है जिसमे दूध मीठा फल सोना चाँदी अन्न या अन्य पदार्थ समिल होते है त्रिवेणी मा गंगा यमुना सरस्वती की पूजा करने से हमारे सभी कार्य सूचारू रूप से गतिमान हो जाते है क्यूकी यह देविया कलयुग मे सभी संसार वासियों के लिए सुलभ है इनके अमृत जलधारा को प्रत्यक्ष आँखो से देखा जा सकता है ओर इनको धारंड किया जा सकता है

₹ 1100/-

महाप्रयश्चित संकल्प

यह हम अपने ऊपर जैसे कि हमने जाने-अनजाने किसी साधु संत , ब्राहमण,गाय माता,जीव हत्या,गुरु निंदा,शास्त्र निंदा वेद निंदा,प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में श्रुण अपराध ,स्त्रीगमन,पराई स्त्री गमन सहवाज ,जाने अनजाने अनेको पुण्य तिथियों में भोजन सहवाज निंदा अपराध तथा अनेको दोषो के निवारण के लिए प्रयाग में आने वाले व्यक्ति (मृतक या जीवित ) के लिए वर्तमान तिथि (दिन) संवत्सर (साल) कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष ,सूर्य उत्तरायण नक्षत्र योग तथा सीन्नक्ट गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम नगर देवता श्री वेणीमाधव जी अक्षयवट के मध्य यह संकल्प कराया जाता है । इसमे आपका गोत्र नाम ,स्वरूप का ध्यान आवश्यक होता है ।

₹ 500/-

श्री प्रयगराज की चरण वन्दना / प्रत्यक्ष देव की पूजा अर्चना मंत्रो द्वारा

सूर्य,पृथ्वी,जल,हवा(वायु) आकाश इनकी पूजा-अर्चना वंदना मंत्रो तथा पदार्थो ,यग्यो(पूजन सामग्री) के द्वारा कराई जाती है,क्योंकि यह हमारा शरीर पंचतत्वो के मिश्रण से बना है ,और मृत्यु के पश्चात उन्ही पंच तत्वो में विलीन हो जाता है । जीवित व्यक्ति के पंचतत्वो को मजबूत तथा व्यक्तित्व प्रभाव शाली बनाने के लिए इस कि पूजा होती है , इस पूजा (यज्ञ) को करने से व्यक्ति आरोग्य,धनवान,सुख,समृद्धि प्राप्त करता है । सभी त्रिथो के राजा प्रयगराज है इसलिए प्रॅयाग मे आ करके इनकी चरण वंदना की जानी आनिवार्य है क्यूकी श्री हरी विष्णु का मुख प्रयगराज है नाभि है बनारस ओर चरण है गया मे |

₹ 500/-

अस्थि पूजा

मृतक व्यक्ति या प्राणी जो अपने मृतक शरीर को छोड़ कर इस मृत्युलोक से बैकुंठलोक की यात्रा पर जाता है ,उसकी आत्मा की शांति के लिए उनकी अस्थियों का पूजन वैदिक रीतियों के द्वारा तथा मंत्रो द्वारा जिसमे लगने वाले पूजन सामग्री जैसे कि अक्षत(चावल) जवा,तील,अबीर,गुलाब,हल्दी,रोली,पान, सुपारी,लोंग, इलायची, फल,फूल,मीठा,धूपबत्ती,कपूर,दूध तथा जल,के द्वारा कराई जाती है। छमा याचना मंत्रो के द्वारा उनका आवाहन करके मृतक प्राणी को सम्पूर्ण सामग्री अर्पण करायी जाती है । उसके बाद उनके दान में लगने वाले नए वस्त्र नए पात्र(बर्तन फुल ,पीतल,ताम्बा )गऊदान बैतरणी नामक नदी को पार करने के लिए ,सोना,चांदी,अन्यदान, भूमिदान,अन्य चौरासी दान का निमीत मूल्य शामिल है । या कोई भी व्यक्ति इन समस्त दान में से कोई भी दान सामग्री साथ में लाकर दान कर सकता है ।

₹ 1100/-

मुंडन संस्कार

पित्र की आत्मा की शांति के प्रतीक माना गया है मुंडन संस्कार खुशी / किसी कारया की सफलता के लिए या बच्चो की मनोती के लिए मुंडन होता है तीर्थराज प्रयागराज मे मुण्ड दान का अपना ही एक महत्व है

₹ 250/-

पिण्डदान (गया वर्ज़न श्राद्ध)

मृतक प्राणी के अस्थि पूजा के बाद पिण्डदान आवश्यक होता है क्यों कि मृतक प्राणी की आत्मा इस मृतु लोक पृथ्वी पर तेरह दिन के अंतर्गत जहाँ होती है उनका स्वरूप पृथ्वी स्वरूप यानी गोल बनाकर उनका आवाहन गोत्र,नाम,स्वरूप (मृतक का) तिथि, वॉर,पक्ष संकल्प के द्वारा,वैदिक मंत्रों द्वारा,पूजन सामग्री के द्वारा कराया जाता है।

₹ 700/-

दषगात्र एकादश: सम्पूर्ण किर्या

मृतक प्राणी के 13दिन के अंदर होने वाले कर्म कांड में महत्व दसवें दिन का होता है ऐसा विदित है कि मृतक प्राणी के दसवे दिन दस अंगो के द्वारा अन्य दूसरी जगह पर जन्म होता है उसी के लिए पिंड बनाकर महा पात्र के दवारा पीपल के पेड़ के नीचे की जाती है फिर इग्यारहें दिन का तथा बारहवें दिन का इस तरह सम्पूर्ण क्रिया में 31 पिंड का दान होता है। दसवें दिन दषगात्र के बाद दाग देने वाला व्यक्ति मुंडन कराता है तथा परिवार के प्राणी भी मुंडन करवाते है । इग्यारहें दिन बाकी पिंड कराकर शय्यादान करके महापात्र ब्राह्मण की विदाई करके शुद्धता आती है ।

₹ 2100/-

तीर्थ श्राद्ध

यह अपने मृतक प्राणी के नाम से मृत्यु के दिन से साल भर 365 दिन का पिण्डदान होता है तथा उसकी पूजा में लगने वाला सारा सामान जवा आटा, दूध घी, शहद,तिल, चावल,अविर,बुका हल्दी,रोली,फूल ,पान का पत्ता सुपारी वगेरह ये सबकी संख्या 365 ही होती है । वैदिक मंत्रों द्वारा पिंडदान किया जाता है उसके बाद ब्राह्मण दक्षिणा तथा भोजन भी शामिल होता है । इसमें त्रिवेड़ी पूजा पहले कराई जाती है तथा संकल्प के बाद पिंड दान होता है । (जिजमान को पूजा के समय धोती व गमछा दान करना पड़ता है । )

शय्यादान

शय्यादान में मृतक प्राणी के नाम पर उनके जीवन मे उपयोग की हुई समस्त वस्तुओं का दान किया जाता है जैसे कि चारपाई (चौकी ,पलंग) दरी,चादर,रजाई, गद्दा,वस्त्र ,पात्र(फूल,पीतल,ताम्बा) सोना ,चांदी,गाड़ी,घोड़ा,मिठाई,फल, (अन्यदान सभी तरह का) जूता,छत,चिमटा,तवा,तथा समस्त उपयोग की वस्तु का दान शामिल होता है उसका मूल्य राशि शामिल होता है

₹ 5100/-

वेणीदान

इस मुंडन का एक रूप वेणीदान है , यह दान आमतौर पर विवाहित जोड़े ही अपने जन्म जन्मांतर के मिलन को अपने सातजन्म तक मजबूत करने के लिये करते है । इसमें विवाहित जोड़े पहले श्री गणेश , गायो की पूजा करते है तथा पुरुष स्त्री के श्रृंगार करते है और स्त्रियां पुरुष का मंत्रोचार के बीच यह पूजा सम्पन कराई जाती है। पूजा शुल्क

₹ 1100

मंगलदोष

मंगल दोषग्रह वाला(कुण्डली में लगा दोष) -इसकी पूजा के पहले कुण्डली देखनी आवश्यक होती है, कुंडली विचार के बाद इसकी पूजा कराई जाती है ,तीन ब्राहमण तीन दिन तक करते है । इसकी पूजा दो विधि से होती है :-

  • (1) वैदिक
  • (2)तंत्रोक्त
  • वैदिक पूजा में जप 31000 होती है ।
  • तंत्रोक्त पूजा में जप 21000 होता है ।
  • मंगल दोष शादी न होने की दशा में
  • 1- घर विवाह
  • 2- तीन ब्राहमण तंत्रोक्त जप 11000 से जप करेंगे 7 दिन में पूजा ₹ 5100 मूल्य निर्धारित है ।

  • (नोट-पंचाक बताता है कि वैदिक जप 11000 से सिद्धि हों जाती है किंतु कलयुग के प्रभाव के कारण चतुगुर्णकृत्वा यानी जप का चौगुना करना चाहिए) मूल्य ₹8100/-

    वस्तुशास्त्र दोष गृहप्रवेश

    नवीन गृह प्रवेश की समय तिथि पत्रा द्वारा तय होगी तथा समान में विष्णु भगवान की प्रतिमा, फ़ोटो लक्ष्मी के साथ मे तथा गृह कलश । भूत प्रेत से मुक्ति तथा सुद्ध वातावरण के लिए किया जाता है ।

    शान्ति हवन

    आपके घर सदैव सुख-शांति बनी रहे , अमंगलकारी ग्रहजन्मदोष,किसी भी तरह की अनिष्टकारी बांधा आपके घर मे प्रवेश नही कर पाएगी तथा आपकी सुख शांति बनी रहेगी ।शांति हवन वैदिक व तान्त्रोक्त दो विधि से होता है। सामग्री:-

  • 1- तिल,
  • 2- तिल का आधा चावल,
  • 3- चावल का आधा जौ,
  • 4- घी देशी गाय का,
  • 5- मीठा में चीनी ,गुड़ ,शक्कर,मिश्री
  • 6- अलग से घी 100 ग्राम,
  • 7- हवन सामग्री में यशाशक्ति अनुसार ड्राई फ्रूट जो आपके पास उपलब्ध हो मिला लें ।
  • 8- पीली सरसों (तान्त्रोक्त)
  • 9- कमलगहटा(तान्त्रोक्त)
  • 10- दूध-फूल कली या आम की लकड़ी,चावल 50ग्राo, रोली,मीठा-पान, सुपारी,लोंग, इलायची(5 पीस)
  • 11- सूखा नारियल,कलाई नाय ।।
  • 12- गूगल ओर लोहबान
  • कालसर्पदोष योग

    पितृ दोष एवं उन्नति में बाधक पुत्र-पौत्रादि के भाग्य बाधक ,व्यापार,घर मे गृह कलेश ऐवमं तरक्की में बाधक होते है दोष ऐवमं स्वप्न में भूत प्रेत -पितृ व सर्प दिखायी दे तो , काल सर्प दोष की शांति पर मारस है । काल सर्प योग कई प्रकार के होते है । ये कुण्डली देखने के बाद ही पता चलता है कि काल सर्प योग किस प्रकार का है पता चलता है । वैदिक रीति अनुसार 3 दिन तक जप चलता है । पाँच ब्राहमण द्वारा (फलाहार अलग से होता है )

    ₹ 8100/-

    एकदशनी रुद्र यज्ञ अभिषेक

    किसी भी तरह के विशेष लाभ आदि के लिए यह पूजा कराई जाती है जैसे-रोग अति लाभ,उन्नति,पद प्रतिष्ठा, अक्षम्य अपराध , आदि ।

  • 1-गणेश पूजन।
  • 2-वरूण कलश पूजन
  • 3-मातृका पूजन।
  • 4-चौसठ योगिनी शवोणश मातृका पूजन
  • 5-नवग्रह पूजन
  • 6-प्रधानपीठ पूजन
  • 7-११ बार कुशोषक से अभिषेक,

  • पांच ब्राह्मण से पूजा -₹5100/- पूजा समान आपका समान सहित ₹9000/-
    11ब्राह्मण से पूजा- 1500/- (समान सहित) (इलाहाबाद से बाहर टिकट किराया लागू आने-जाने का)

    भागवत कथा

  • 1-श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ
  • 2-नवाह रामचरित मानस ज्ञान महायज्ञ
  • समस्त पित दोष जन्म जन्मांतर सकल पाप-ताप निवारणार्थ एवम समस्त परिवार अकाल मृत्युदोष प्रेम मुक्ति एवम इल्लोकिक चतुपुरुषार्थ अर्थ,धर्म,काम -मोक्ष फल प्राप्ति निमित्यार्थ सदशास्त्र वर्णित पंचम वेद भागवत ज्ञान महायज्ञ से भागवतकृपा से ये सारी सिद्धिया प्राप्त होती है जीवन मे भक्ति महारानी का प्रवेश होता है जिनके आने से ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है । जीवन की पूर्णतः सवशास्त्र में इसे ही बताया है ।